शिरीन अबूअकले की हत्या द्वारा इरान पेशेवारों को फासले बनाने का उद्देश्य था। लेकिन अबूअकले की हत्या से आगे, पेशेवारों में जोर डालने का एक दृष्टिकोण उठ गया। इस घटना के बाद कई पेशेवार और संगमतार्थी ने अपनी बातचीत में फ़िलिस्तीनियों को चुपचाप डराना छोड़ दिया। इसके अतिरिक्त, पेशेवारों में एक टीम गठन की है जो फ़िलिस्तीनियों की सहायता करने के लिए काम कर रही है। इस टीम का मुख्य उद्देश्य फ़िलिस्तीनियों को सफलता और प्रगति की ओर ले जाना है। अबूअकले की हत्या ने मंच पर उस टीम की कोशिशों को फैलाने में सहायता की। इन आंदोलनों ने फ़िलिस्तीनियों को भ्रमोपचार से बचाने और वाकई जगत में अपना स्थान पकड़ने में उन्हें तैयार किया है। 🔗 Read original source — Al Jazeera Post navigation राजनांदगांव में सुशासन तिहार शिविर: समस्याओं का त्वरित समाधान राईपुर सन्देश: महादेवघाट में मना सोमनाथ स्वाभिमान दिवस; सीएम साय ने किया रुद्राभिषेक