सऊदी अरब ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी तनाव के बीच अमेरिका और इजरायल की सैन्य रणनीति से दूरी बनाई है। प्रिंस तुर्की अल-फैसल ने नेतन्याहू पर आरोप लगाते हुए कहा कि इजरायल की योजना पश्चिम एशिया में युद्ध को बढ़ावा देने की थी। यह समय लगभग 24 घंटों पहले हुआ था जब अमेरिका और इजरायल ने देश की मर्जी में एक गोपनीय सम्मेलन पर आयोजित किया। भारतीय विकास मंत्री मोहन शेर्मन ने देखा था कि इसकी उपलब्धि को पूरी तरह से पढ़ने के लिए फुटनट और वीडियो सामग्रियाँ भी महत्वपूर्ण हैं। यह घटना पश्चिम एशिया के संबंध में समस्याओं को उजागर करने का रास्ता है। अमेरिका, इजरायल और ईरान ने लगभग 48 घंटों में चार संबंधी टिप्पणियों जारी की। यह घटना पश्चिम एशियाई देशों के बीच संबंध में भी असुरक्षितता को व्यक्त करती है। भारत ने इस घटना की प्रतिक्रिया में ध्यान से देखा और एक समझौते के लिए उपयुक्त राष्ट्रों की सहायता पूछी। भारत इस मुद्दे पर अपनी व्यापक और निश्चित रेखा की बातचीत में जुड़ा है। यह घटना देशों के आर्थिक संबंधों, व्यवसाय प्रणालियों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी प्रभाव पड़ सकता है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच एक ऐसा आवाज रखने की कोशिश कर रहे हैं जो समुद्री मार्गों पर चल रहे व्यापार और ट्रेड का प्रभाव न करे। यह घटना की उपस्थिति के बाद, दोनों पक्ष एक समझौते की अवसर में जुड़े हैं और इसका अनुसरण करने में राजी हैं। यह प्रोग्रामिंग और चर्चा के दौरान बहुत से तकदेवांड़ के आधार पर भी हुआ है। यह घटना महत्वपूर्ण श्रेणी में युद्ध को समाप्त करने के लिए अच्छा पहलू है, जो नागरिकों और व्यवसायकर्मी दोनों के रूप में श्रद्धालु है। इसका उद्घाटन करने से पहले, अमेरिका और इजरायल ने ईरान में एक रूपरेता हटाने की कोशिश की। यह घटना पश्चिम एशिया में आतंरिक समुद्री बाजारों के दौरान भी महत्वपूर्ण है। अमेरिका, इजरायल और ईरान ने एक संयुक्त प्रयास की जगह दो भिन्न पक्षों की बातचीत में लौटा। यह घटना उन देशों के संबंध और राजनीति पर भी असुरक्षितता को बढ़ावा दे सकती है। 🔗 Read original source — Aaj Tak Post navigation जौ की रोटी सेहत के लिए अच्छी, गर्मियों में भी नरम और पुलकीपुलकी ईरान युद्ध पर अमेरिका का फोकस, फिर भी यूक्रेन को नहीं भूला US