जालोर जिले के छोटे से गांव सियाणा से महेश्वरी चौहान का निशानेबाजी का सफर शुरू हुआ। उनके पिता ने बेटी की ट्रेनिंग के लिए 18 बीघा जमीन में शूटिंग रेंज तैयार करवाई। इसी सुविधा में महेश्वरी ने निशानेबाजी का अभ्यास किया। लगातार मेहनत के बाद उनका सफर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा। महेश्वरी ने जापान में आयोजित प्रतियोगिता में मेडल जीतकर उपलब्धि हासिल की। उनकी सफलता से सियाणा गांव का नाम भी चर्चा में आया है। महेश्वरी की कहानी ग्रामीण क्षेत्र से अंतरराष्ट्रीय खेल मंच तक पहुंचने की मिसाल बनी है। उनके पिता ने शुरुआत से ही बेटी के खेल करियर को आगे बढ़ाने में सहयोग किया। शूटिंग रेंज तैयार होने से उन्हें अभ्यास के लिए स्थानीय स्तर पर सुविधा मिली। महेश्वरी ने अपनी प्रतिभा और मेहनत से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लिया। जापान में मेडल जीतना उनके अब तक के सफर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है।

Source: Source