बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एससी/एसटी एक्ट से जुड़े मामले में गिरफ्तार पत्रकार मोहन निषाद को जमानत दे दी। न्यायालय ने यह कहा कि आरोपों की जांच जारी रह सकती है, परंतु पत्रकार को बंधी रखने से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस के अधिकारों पर अनावश्यक प्रतिबंध लग सकता है। जमानत के आदेश में, न्यायालय ने यह बाध्य किया है कि निषाद को कोई भी नया अपराध न करना होगा और यदि वह पक्षाघात, साक्ष्य नष्ट करने या न्याय प्रक्रिया में बाधा डालने का प्रयास करता है तो जमानत रद्द की जा सकती है। इस निर्णय से पत्रकार समुदाय ने राहत व्यक्त की है और इसे प्रेस की स्वतंत्रता की सुरक्षा में एक सकारात्मक कदम माना गया है। केस अभी भी चल रहा है, और आगे की सुनवाई में आगे की कार्यवाही निर्धारित की जाएगी। Post navigation टीआई धाकड़ की धाकड़गिरी: बिना वारंट पुलिस ने महिला के घर में घुसकर दी धमकी, वीडियो वायरल गुप्त सूचना पर पुलिस ने मौत का सामान ले कर घूम रहे दो नशीली दवा तस्करों को गिरफ़्तार किया