सुकमा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष हरीश कवासी ने सरकार द्वारा सुकमा जिले को नक्सल मुक्त घोषित किए जाने के बाद दो प्रमुख मांगें उठाई हैं। उन्होंने कहा कि यदि जिला पूरी तरह नक्सल मुक्त हो चुका है, तो फर्जी मुकदमों में वर्षों से जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों को तुरंत और बिना शर्त रिहा किया जाना चाहिए। कवासी ने आरोप लगाया कि सैकड़ों आदिवासी परिवारों को कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए अपनी जमीन तक बेचनी पड़ रही है, जिससे वे गहरे आर्थिक और मानसिक संकट में हैं। उन्होंने सरकार से इन मामलों की त्वरित सुनवाई करने और पीड़ितों को सरकारी वकील मुहैया कराने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी और वरिष्ठ नेता कवासी लखमा द्वारा गृहमंत्री के समक्ष उठाए गए मुद्दों का भी समर्थन किया। दूसरी बड़ी मांग के तहत हरीश कवासी ने आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास की बदहाल व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुनर्वास केंद्रों में पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है। कांग्रेस नेता ने मांग की कि मुख्यधारा में लौटे उन नक्सलियों को, जो सुरक्षा कारणों से अपने गांव नहीं जा सकते, जिला मुख्यालय के पास पांच-पांच एकड़ कृषि भूमि, पक्का मकान और उनकी योग्यता के अनुसार सरकारी या अन्य रोजगार दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की, तो कांग्रेस पीड़ित परिवारों और आदिवासी समाज के साथ मिलकर रायपुर से लेकर दिल्ली तक एक बड़ा आंदोलन खड़ा करेगी।

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