सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी महिला, विशेषकर नाबालिग को, अनिच्छा से गर्भधारण को जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। अदालत ने सात महीने गर्भावस्था वाली नाबालिग के मामले में गर्भपात की स्वीकृति दी, जिससे गर्भपात के उच्चतम समय सीमा पर नई कानूनी दिशा निर्धारित हुई। यह ruling महिलाओं के bodily autonomy और उनके अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देती है। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि न्यायिक प्रक्रियाओं में महिला के स्वास्थ्य, भावनात्मक और सामाजिक स्थिति को ध्यान में रखा जाना चाहिए। इस फैसले से भविष्य में गर्भावस्था से संबंधित मामलों में सुनवाई की प्रक्रिया में लचीलापन आने की उम्मीद है, और महिलाओं को अनिच्छित गर्भधारण के बारे में अधिक अधिकार मिलेगा। Post navigation डॉक्टर पिता की बेटी की रहस्यमयी मौत: पुलिस ने कमरे को सील कर जुटाए सबूत पत्रों में दो बड़ी खबरें: रक्षा बजट में कमी और पिंट का दाम अब £10