नासा के अनुसार, स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट का ऊपरी चरण 5 अगस्त को चंद्रमा से टकराया। वैज्ञानिकों के लिए यह घटना चंद्रमा पर होने वाले प्रभावों का अध्ययन करने का अनूठा अवसर बनी। रॉकेट चरण की चंद्रमा तक पहुंचने वाली दिशा समय के साथ सौर गतिविधियों और गुरुत्वाकर्षण बलों से प्रभावित हुई थी। वैज्ञानिकों ने इस टकराव की निगरानी के लिए कई अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया। दक्षिण कोरिया के डैनुरी चंद्रयान ने भी घटना से जुड़े अवलोकन किए। जमीन पर मौजूद विभिन्न दूरबीनों से भी टकराव की निगरानी की गई। इन उपकरणों ने प्रभाव और उससे उठे मलबे के गुबार को रिकॉर्ड किया। घटना का पूर्वानुमान पहले से लगाया गया था, जिससे वैज्ञानिकों को इसके अध्ययन की तैयारी का मौका मिला। रॉकेट के ऊपरी चरण का चंद्रमा से टकराना अंतरिक्ष मलबे के नियंत्रित निपटान का उदाहरण भी माना जा रहा है। ऐसे निपटान से अंतरिक्ष में अनियंत्रित मलबे से जुड़े जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, इस तरह की घटनाएं वैज्ञानिकों को चंद्र सतह और उस पर पड़ने वाले प्रभावों को समझने में उपयोगी डेटा देती हैं। वैज्ञानिक इस घटना से मिले आंकड़ों का विश्लेषण कर चंद्रमा पर प्रभावों के बारे में नई जानकारी जुटा रहे हैं। टकराव से बने मलबे के गुबार का अध्ययन चंद्र सतह की संरचना को समझने में भी मदद कर सकता है। इस घटना ने अंतरिक्ष मिशनों से जुड़े वैज्ञानिक और सुरक्षा संबंधी पहलुओं को एक साथ सामने रखा है।

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