हरियाणा में बिजली क्षेत्र में निजी कंपनी को समानांतर लाइसेंस देने के विरोध में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रही। हड़ताल के कारण प्रदेश के कई जिलों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है और आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में बिजली संकट के साथ पीने के पानी की किल्लत भी सामने आई है। इस बीच हड़ताली कर्मचारियों और बिजली मंत्री अनिल विज के बीच आज दोपहर 3 बजे बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि इससे हड़ताल समाप्त होने की संभावना जुड़ी हुई है। अनिल विज ने उम्मीद जताई है कि बातचीत के जरिए हड़ताल खत्म हो सकती है। उन्होंने कहा कि हड़ताल किसी समस्या का समाधान नहीं है और सरकार कर्मचारी नेताओं की ओर से सुझाए गए विकल्पों पर भी विचार करेगी। कर्मचारियों को मनाने के लिए सरकार निजी कंपनी का लाइसेंस रद्द करने सहित अन्य संभावनाओं पर विचार कर सकती है। इसके लिए संबंधित इलेक्ट्रिसिटी एक्ट की धारा 108 के तहत कार्रवाई का विकल्प भी चर्चा में है। हालांकि, कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक समानांतर लाइसेंस रद्द नहीं किया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। हड़ताली यूनियन का दावा है कि विभिन्न बिजली निगमों के 50 हजार से अधिक कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं। इनमें करीब 40 हजार नियमित कर्मचारी हैं, जबकि बाकी अनुबंधित या अस्थायी कर्मचारी बताए गए हैं। आंदोलन को मजबूत करने के लिए कई कर्मचारी यूनियन और अन्य संगठन भी एकजुट हुए हैं। संयुक्त मोर्चा के प्रवक्ता रविंद्र घणगस के अनुसार, पांच प्रमुख यूनियन इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हैं। इनमें बिजली निगमों के कर्मचारी संगठनों के साथ अनुबंधित कर्मचारी यूनियन और हरियाणा पावर इंजीनियर फेडरेशन भी शामिल हैं। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि सफाई कर्मचारियों, शिक्षक संगठनों, सोलर एसोसिएशन और उत्तर भारत के कुछ अन्य संगठनों का भी उन्हें समर्थन मिल रहा है। अब बिजली मंत्री के साथ होने वाली बैठक से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि सरकार और कर्मचारियों के बीच कोई सहमति बनती है या हड़ताल आगे भी जारी रहती है।

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