छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु ने पत्नी और दो नाबालिग बेटियों के भरण-पोषण मामले में फैमिली कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने डॉक्टर पति द्वारा फैमिली कोर्ट के क्षेत्राधिकार को चुनौती देने वाली पुनरीक्षण याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि पत्नी वर्तमान में बिलासपुर में रह रही है, तो उसे बिलासपुर फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण की याचिका दायर करने का पूरा कानूनी अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि केवल स्थायी पता सारंगढ़ होने के आधार पर अदालत के क्षेत्राधिकार को चुनौती नहीं दी जा सकती। मामले के अनुसार, सारंगढ़-बिलाईगढ़ के एक डॉक्टर की शादी मई 2019 में हुई थी और उनकी दो बेटियां हैं। पत्नी ने आरोप लगाया कि शादी के बाद उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया और पति के अवैध संबंधों का विरोध करने पर उसे दोनों बच्चियों के साथ घर से निकाल दिया गया। आय का कोई साधन न होने के कारण पत्नी ने बिलासपुर फैमिली कोर्ट में बीएनएसएस की धारा 144 के तहत कुल 1.40 लाख रुपये मासिक भरण-पोषण की मांग की थी। पति ने इस पर आपत्ति जताई थी कि शादी सारंगढ़ में हुई थी और पत्नी भी वहीं की रहने वाली है, इसलिए बिलासपुर में सुनवाई नहीं हो सकती। डॉक्टर पति ने खुद को पोलियो पीड़ित बताते हुए दावा किया था कि पत्नी ने बिलासपुर का फर्जी किरायानामा पेश किया है। हालांकि, पत्नी ने कोर्ट में सबूत पेश किए कि वह बिलासपुर के लगरा में किराए पर रह रही है और बच्चियां भी वहीं के स्कूल में पढ़ रही हैं। हाईकोर्ट ने पत्नी के दस्तावेजों को सही पाते हुए कहा कि पैतृक घर कहीं और होने से वर्तमान निवास स्थान की अदालत का अधिकार खत्म नहीं होता। अदालत ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए पति की याचिका को शुरुआती सुनवाई के स्तर पर ही खारिज कर दिया। Source: Source Post navigation छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: एक ही दिन दो परीक्षाओं के टकराव पर परीक्षा तिथि बदलने से इनकार, D.El.Ed अभ्यर्थियों को मिला वैकल्पिक अवसर हलालपुर महिला पहलवान हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला, मुख्य आरोपी को आजीवन कारावास से भी कठोर सजा