गोरखपुर में कथित ठगी के बाद पशु चिकित्सक डॉ. परमात्मा सिंह की मौत का मामला सामने आया है। आरोप है कि होम लोन खत्म कराने के नाम पर उनके दस्तावेज लिए गए थे। इसके बाद छह बैंकों से करीब 1.40 करोड़ रुपये के लोन कराए गए। डॉक्टर की मासिक आय करीब सवा लाख रुपये बताई गई है। वहीं, उन पर करीब तीन लाख रुपये की मासिक EMI का बोझ पड़ गया। बढ़ते कर्ज और EMI के दबाव से उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती गई। मामले में गरिमा सिंह पर ठगी के आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि डॉक्टर के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अलग-अलग बैंकों से कर्ज लिया गया। भारी वित्तीय देनदारी के चलते डॉक्टर पर लगातार दबाव बढ़ता गया। परिजनों के अनुसार, कर्ज का बोझ उनकी आय की तुलना में कई गुना अधिक हो गया था। इसी तनाव के बीच डॉक्टर ने अपनी जान दे दी। घटना ने लोन और दस्तावेजों के नाम पर होने वाली कथित वित्तीय ठगी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

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