ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सैकड़ों छोटी और तेज नावों का जाल बिछा दिया है। सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार, इस क्षेत्र में लगभग 100 ऐसी नावें तैनात की गई हैं। यह एक्शन अमेरिका की नाकेबंदी और ईरानी जहाजों पर हुए हमलों के बाद लिया गया है। इस क्षेत्र का विश्व व्यापार पर बड़ा प्रभाव पड़ता है क्योंकि यह दुनिया के 20 प्रतिशत के कच्चे तेल के परिवहन का मार्ग है। होर्मुज जलडमरूमध्य दक्षिण पूर्वी एशिया से लेकर मध्य पूर्व तक तेल के निर्यात का मुख्य मार्ग है। अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं और इस क्षेत्र में अपनी नौसेना की तैनाती बढ़ाई है। इसी के जवाब में ईरान के आर्मी इंटरनेशनल रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने छोटी नावों के जाल को तैनात किया है। यह रणनीति अमेरिकी नावों को असर करने और तेल शिपिंग को सुरक्षित रखने के लिए ली गई है। अमेरिकी सैटेलाइट कंपनियों के डेटा के अनुसार, ईरान की यह नावें तेजी से आगे बढ़ने वाली हैं। इनमें से कई नावों पर मिसाइल लगी हुई हैं। इससे अमेरिका की नौसेना के लिए चुनौती पैदा हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ईरान के लिए रणनीतिक रूप से लाभदायक होगा। इससे अमेरिकी नावों को यहां आने में दिक्कत होगी, जिससे तेल शिपिंग के मार्ग में विघ्न आ सकता है। इस घटना का विश्व अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। विश्व तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है, जिससे ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह तनाव बढ़ता है, तो वैश्विक आर्थिक विकास पर नकारात्मक असर पड़ेगा। दूसरी ओर, इससे ईरान के पास अधिक व्यापारिक शक्ति मिलेगी। यह घटना अमेरिका-ईरान संबंधों के नए चरण को दर्शाती है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिकी और ईरानी नौसेना की तैनाती बढ़ने से इस क्षेत्र में तनाव बढ़ा है। अमेरिकी सैटेलाइट तस्वीरों में दिखाई गई नावों की संख्या इस बात का संकेत देती है कि ईरान ने अपनी रक्षा रणनीति को मजबूत कर लिया है। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को इस मामले पर ध्यान देने की जरूरत है। वैश्विक तेल व्यापार के लिए यह क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए इस पर नजर रखना आवश्यक होगा। Post navigation Raipur Crime News: बाजार चौक में ऑटो चालक युवक पर तलवार से हमला, दो सगे भाई को पुलिस ने दबोचा रायपुर में चाकू लेकर राहगीरों को डराने वाला अभय साहू गिरफ्तार, पुलिस ने बताया ये बातें