हरीश राणा 13 साल तक परसिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट (लगातार अचेत अवस्था) में रहे। लंबे समय तक उपचार के बावजूद उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद उन्हें इच्छामृत्यु दी गई। यह मामला मेडिकल और कानूनी दोनों दृष्टिकोण से काफी संवेदनशील रहा। निधन के बाद उनके परिवार ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए उनके अंगदान का निर्णय लिया। उनकी आंखें और दिल दान किए गए, जिससे कई जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिला। डॉक्टरों ने इसे अंगदान की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम बताया। इस घटना ने गंभीर बीमारियों और जीवन-अंत निर्णयों पर चर्चा को फिर से तेज कर दिया है। परिवार ने कहा कि उनका निर्णय दूसरों के जीवन बचाने की भावना से प्रेरित था। यह कहानी जीवन, मृत्यु और मानवता के गहरे सवालों को सामने लाती है। Source: Source Post navigation दुबई में मजाक बना मुसीबत, भारतीय कॉमेडियन को 47 दिन डिटेंशन में रहना पड़ा जालंधर में मनी लॉन्ड्रिंग केस: पूर्व कांग्रेस विधायक किक्की ढिल्लों ED के सामने पेश