कुंवर बासित अली ने भाजपा में करीब 15 वर्षों के संगठनात्मक संघर्ष के बाद बड़ा मुकाम हासिल किया है। पार्टी में शामिल होने के उनके फैसले का परिवार और समाज के कुछ लोगों ने कड़ा विरोध किया था। उनके अनुसार, पिता ने विरोध में उन्हें जूतों और लाठियों से भी पीटा था। सामाजिक तानों और विरोध के बावजूद उन्होंने भाजपा से अपना जुड़ाव नहीं छोड़ा। बासित अली ने लंबे समय तक संगठन में एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में काम किया। लगातार मेहनत और पार्टी के प्रति निष्ठा के चलते उनका राजनीतिक कद बढ़ता गया। उन्होंने संगठन के विभिन्न दायित्वों को निभाते हुए अपनी पहचान बनाई। अब उन्हें भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है। यह उनके राजनीतिक सफर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। बासित अली का सफर पार्टी में जमीनी स्तर से शीर्ष संगठनात्मक जिम्मेदारी तक पहुंचने का उदाहरण है। उनकी नियुक्ति को भाजपा के अल्पसंख्यक समुदाय तक पहुंच बढ़ाने की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने विरोध के बावजूद पार्टी में अपनी राजनीतिक यात्रा जारी रखी। 15 साल की मेहनत के बाद मिली यह जिम्मेदारी उनके लंबे संगठनात्मक सफर को दर्शाती है। Source: Source Post navigation ‘संवैधानिक विकृति’ है वन नेशन, वन इलेक्शन बिल: पी चिदंबरम ने किया विरोध योगी कैबिनेट की बैठक आज, दारोगा-सिपाही भर्ती नियमों में बदलाव समेत 19 से ज्यादा प्रस्तावों पर चर्चा