छत्तीसगढ़ के जशपुर की एक अनपढ़ विधवा को पेंशन के लिए करीब 15 वर्षों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़े। विभागीय अधिकारियों ने सर्विस बुक गुम होने का हवाला देकर उसकी पेंशन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई। लंबे समय तक पेंशन नहीं मिलने से महिला को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। मामले में पीड़िता ने न्याय के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने महिला को हुई मानसिक प्रताड़ना को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने राज्य सरकार को पीड़िता को 25 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि मुआवजे की राशि दोषी अधिकारियों के वेतन से वसूली जा सकती है। अदालत के फैसले से लंबे समय से न्याय का इंतजार कर रही महिला को राहत मिली है। मामले ने सरकारी रिकॉर्ड और पेंशन संबंधी मामलों में लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। हाईकोर्ट ने प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने का संदेश दिया है। पेंशन के लिए वर्षों तक भटकने के बाद महिला को अदालत से राहत मिली है।

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