उत्तर प्रदेश में 19 साल पहले लापता हुई एक युवती से जुड़े मामले में पांच आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। अदालत ने 2007 के अपहरण मामले में यह फैसला दिया, जिसका उद्देश्य कथित रूप से दुष्कर्म मामले की गवाह को चुप कराना था। पीड़िता लंबे समय से अपने परिवार से दूर है और अब तक घर वापस नहीं लौटी। युवती की मां ने फैसले पर खुशी जताई, लेकिन इस लंबी कानूनी लड़ाई की भारी कीमत को भी याद किया। परिवार ने बेटी को खोने के साथ-साथ मुकदमे की लड़ाई में कई मुश्किलों का सामना किया। पीड़िता के पिता ने भी वर्षों तक न्याय के लिए संघर्ष किया, लेकिन उनका निधन हो गया। मामले की पैरवी के दौरान परिवार को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। उन्होंने अपनी जमीन और भैंस तक बेच दी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। अदालत के फैसले को परिवार ने न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। हालांकि, युवती के अब तक नहीं मिलने का दर्द परिवार के लिए बना हुआ है। यह मामला लंबे समय तक चले न्यायिक संघर्ष और पीड़ित परिवार की कठिनाइयों को दर्शाता है। Source: Source Post navigation मनरेगा घोटाले में 20 साल बाद चार्जशीट, 1.69 करोड़ की गड़बड़ी में 8 अधिकारी आरोपी KK श्रीवास्तव से ED की पूछताछ तेज, 15 करोड़ ठगी और 441 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन की जांच