1918 में एक जहाज़ दुर्घटना के बाद काले चूहे एक दूरस्थ द्वीप पर पहुंच गए। इस द्वीप की पहचान लॉर्ड होवे आइलैंड के रूप में की गई है। इन चूहों ने वहां की स्थानीय वन्यजीव प्रजातियों पर भारी असर डाला। कई छोटे जीव और पक्षियों की आबादी गंभीर रूप से घटने लगी। समय के साथ यह समस्या पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बड़ा संकट बन गई। बाद में वैज्ञानिकों और प्रशासन ने मिलकर चूहों को हटाने के लिए एक सफल कार्यक्रम चलाया। इस उन्मूलन अभियान के बाद द्वीप पर प्राकृतिक संतुलन धीरे-धीरे बहाल होने लगा। एक सदी से अधिक समय बाद शोधकर्ताओं ने वहां एक अप्रत्याशित बदलाव देखा। जिन बड़े अकशेरुकी जीवों को पहले चूहे खा जाते थे, उनकी संख्या तेजी से बढ़ गई। इससे स्थानीय छिपकलियों और पक्षियों को अतिरिक्त भोजन स्रोत मिलने लगा। यह बदलाव दर्शाता है कि जब बाहरी दबाव हटाया जाता है तो पारिस्थितिकी तंत्र कितनी तेजी से पुनर्जीवित हो सकता है। वैज्ञानिकों ने इसे पर्यावरणीय पुनर्स्थापन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया है।

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