1984 के सिख विरोधी दंगों के दोषी पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्हें मृत अवस्था में सफदरजंग अस्पताल लाया गया था। सज्जन कुमार दिसंबर 2018 से तिहाड़ जेल में बंद थे। दिल्ली हाईकोर्ट ने 1984 के एक दंगा मामले में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दिल्ली कैंट के पालम कॉलोनी इलाके में पांच सिखों की हत्या और गुरुद्वारा जलाने के मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया था। सितंबर 2023 में उन्हें सुल्तानपुरी में तीन सिखों की हत्या के एक मामले में बरी कर दिया गया था। फरवरी 2025 में सरस्वती विहार में दो सिखों की हत्या के मामले में भी उन्हें दोषी ठहराया गया। इसके बाद उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। उनकी मौत पर 1984 दंगा पीड़ितों ने असंतोष जताया है। 1984 वेलफेयर सोसाइटी की महिला विंग की अध्यक्ष बीबी गुरदीप कौर ने कहा कि पीड़ितों को उनकी फांसी से संतुष्टि मिलती। उन्होंने कहा कि दंगों के जख्म आज भी लोगों के लिए जिंदा हैं। सज्जन कुमार की मौत के साथ उनके खिलाफ चल रहे मामलों और पीड़ितों के न्याय से जुड़े सवाल फिर चर्चा में आ गए हैं। Source: Source Post navigation शिमला ग्रीन बेल्ट में अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त, वन अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल नाबालिग के शोषण मामले में पांच दोषियों को उम्रकैद, राजनांदगांव POCSO कोर्ट का सख्त फैसला