बोटुलिनम टॉक्सिन टाइप A, जिसे 1980 के दशक में आंखों के विकारों के इलाज के लिए विकसित किया गया था, ने संयोगवश कॉस्मेटिक लाभ दिखाए। नेत्र रोग विशेषज्ञों ने देखा कि स्ट्रैबिस्मस (भेंगापन) जैसी बीमारियों का इलाज करा रहे मरीजों के चेहरे की झुर्रियाँ कम हो रही थीं। यह 1987 में पूरी तरह से आकस्मिक खोज थी, जिसने कॉस्मेटिक दुनिया की दिशा बदल दी। इस खोज के बाद औपचारिक शोध शुरू हुए, जिनमें झुर्रियों पर इसके प्रभाव का गहन अध्ययन किया गया। इस शोध ने बोटोक्स को चिकित्सीय उपयोग से ब्यूटी ट्रीटमेंट तक पहुँचाने का रास्ता बनाया। अंततः वर्ष 2002 में अमेरिकी एफडीए ने कॉस्मेटिक उपयोग के लिए बोटोक्स को मंजूरी दे दी। तब से लेकर आज तक यह एंटी-एजिंग उपचारों में सबसे लोकप्रिय विकल्प बन चुका है। यह खोज चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में एक मील का पत्थर है, जहाँ एक औषधि का दायरा पूरी तरह बदल गया। Source: Source Post navigation केट मिडलटन का ‘बैक टू नेचर’ गार्डन: जानें कहानी और जिन बच्चों के लिए बनाया गया था यह अनोखा बगीचा भिवानी में विश्व साइकिल दिवस: स्काउट्स-गाइड्स ने निकाली नशा मुक्ति रैली, नुक्कड़ नाटकों से लोगों को किया जागरूक