जीएमसी (GMC) हॉस्टल की जर्जर हालत को सुधारने के लिए हाल ही में 3.5 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश किया गया था, लेकिन पहली ही बारिश ने इस मरम्मत कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हॉस्टल की छतें और दीवारें एक बार फिर लीक (leak) होने लगी हैं, जिससे छात्रों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। छात्रों का आरोप है कि मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई और करोड़ों रुपये की भारी राशि बर्बाद हो गई। सीलन के कारण हॉस्टल के कमरों में रहना मुश्किल हो गया है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ गए हैं। हॉस्टल प्रबंधन और लोक निर्माण विभाग की लापरवाही से नाराज छात्रों ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। इस घटना ने निर्माण कार्य में हुए भ्रष्टाचार और तकनीकी खामियों की पोल खोल दी है। प्रशासन ने मामले की रिपोर्ट मांगी है, लेकिन छात्रों का कहना है कि वे इस अव्यवस्था के बीच अपनी पढ़ाई जारी रखने में असमर्थ हैं। Source: Source Post navigation एमएसयू में 75% उपस्थिति का नियम अनिवार्य, अगले सप्ताह से चार दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम