ब्रिटेन के संसद में टर्मिनल रोगियों के लिए सहायतापूर्ण आत्महत्या को वैध बनाने का विधेयक कई बार टालमटोल के बाद असफल हो गया। इस बाधा के बावजूद, विधेयक के समर्थक—मानव अधिकार समूह, डॉक्टरों की संघटनाएँ और कई लोकप्रिय राजनेता—हमें आश्वस्त करते हैं कि वे फिर से प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में सार्वजनिक राय के बदलते रुझान और यूरोप के कई देशों में समान कानूनों की सफलताएँ इस मुद्दे को फिर से उठाने की प्रेरणा देंगे। कार्यकर्ताओं का मानना है कि दीर्घकालिक रोगियों को डॉर्सेलिंग के बजाय कष्ट‑मुक्त जीवन समाप्ति का विकल्प मिलना चाहिए। आगामी सत्र में वे नई रणनीति अपनाते हुए विधेयक को पुनः पेश करने की योजना बना रहे हैं, जिससे अंततः रोगियों के अधिकारों को सुरक्षित किया जा सके। Post navigation क्या यूरोप मध्य‑पूर्व में ईरान के खिलाफ युद्ध को सुलझा सकता है? रायपुर में टैंकर से गंदे पानी की आपूर्ति पर निगम ने ठेकेदार पर लगाया भारी जुर्माना, सभी टैंकर चालकों को दी कड़ी चेतावनी