अमेरिकी दबाव से ईरान और लेबनान के साथ हुए एंटी‑टेरर वार्ता‑विराम, इज़राइल के लिए सहज नहीं हैं। दो देशों के साथ वार्ता‑विराम के शर्तें, अस्लाह को उठाते हुए, अमेरिकी हाई‑स्टेक नीतियों के तहत तय की गईं, न कि इज़राइली दखल से। इस कारण इज़राइल को अपनी रणनीतिक योजनाओं को फिर से आंकना पड़ रहा है, क्योंकि अब उसके पास सीमित आगे बढ़ने की जगह है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यू.एस. के आदेशों से इज़राइल की सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव को खतरा है, जबकि वाशिंगटन ने कहा कि स्थिरता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस तनावपूर्ण मोड़ पर दोनों देशों के बीच तालमेल और अमेरिकी हाथों की भूमिका भविष्य की भू‑राजनीतिक दिशा तय करेगी। Post navigation अयोध्या में उत्तराखंडवासियों का नया ठिकाना: शरनाम मंदिर से दूरी की जानकारी लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई: महिला बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक पर 4,000 रूपए की रिश्वत के साथ 50,000 रूपए की नियुक्ति के लालच का पर्दाफाश