कोलकाता हाईकोर्ट ने एक प्रोफेसर की 20 साल पुरानी रेप की सजा को पलटते हुए विवादास्पद मिसाल कायम की है। अदालत ने कहा कि विशेष लोक अभियोजक और जांच अधिकारी की गंभीर कमियों के कारण यह सजा सही नहीं थी। न्यायाधीशों ने कहा कि संदिग्ध प्रथाओं और जांच में चूक ने मुकदमे की निष्पक्षता को प्रभावित किया। इसके साथ ही कोर्ट ने प्रोफेसर को 10 लाख रुपये के मुआवजे का भी आदेश दिया। फैसले ने न्यायिक प्रक्रिया और सबूतों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत ने कहा कि दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे। पीड़िता के अधिवक्ता ने फैसले को झटका बताते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है। मामले में अभियोजन और पुलिस जांच की पद्धति पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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