शहर भर में पशु कल्याण कार्यकर्ताओं ने आवारा जानवरों को निरंतर पानी उपलब्ध कराने के लिए कई पहलें शुरू की हैं। स्थानीय NGOs ने सार्वजनिक जगहों पर पानी के कटोरे और गिट्टर स्थापित किए हैं, जबकि स्वयंसेवक रोज़ाना इनकी स्थिति जाँचते और साफ़-सफ़ाई करते हैं। सामाजिक मंचों पर जल आपूर्ति की कठिनाइयों के बारे में जागरूकता अभियानों को तेज़ी से चलाया जा रहा है; फोटो और वीडियो शेयर करके लोगों को सहभागी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। कई स्कूलों और कॉलेजों ने भी इस कारण को अपने छात्रों तक पहुँचाया, ताकि वे अपने आस-पास के पार्कों और चौराहों पर जलस्थलों की देखभाल में मदद कर सकें। इस सामुदायिक सहयोग से न केवल जानवरों की प्यास बुझ रही है, बल्कि शहर में मानवीय जिम्मेदारी और सहानुभूति की भावना भी पनप रही है। Post navigation चार साल के बच्चे में कोक्लीयर इम्प्लांट सर्जरी सफल हरियाणा विधानसभा ने महिला सशक्तिकरण प्रस्ताव पारित किया; कांग्रेस ने सत्र का बहिष्कार किया