दिल्ली के एक मरीज को दो बार किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) की सर्जरी कराने के बाद भी दर्द से राहत नहीं मिली, जिसे उपभोक्ता आयोग ने चिकित्सा लापरवाही माना। आयोग ने एक सर्जन और अस्पताल को दोषी ठहराते हुए मरीज को 1 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। अस्पताल और डॉक्टर ने पहले दिए गए आदेश को चुनौती दी थी, लेकिन आयोग ने अपील खारिज करते हुए पिछले फैसले को बरकरार रखा। विशेषज्ञ की राय में इतने बड़े स्टोन का इतनी जल्दी दोबारा बनना संभव नहीं था, जिससे अस्पताल का बचाव कमजोर हो गया। मरीज लगातार दर्द से परेशान था और उसने बिना किसी राहत के दो बार सर्जरी झेली। यह मामला चिकित्सा क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। आयोग ने इसे स्पष्ट लापरवाही का मामला बताते हुए मुआवजा देने का आदेश सुनाया।

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