हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान एवं संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ईंधन आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर दबाव डाला है। दोनों पक्षों की नौसैनिक गतिविधियों के तीव्र होने से शिपिंग लाइनें बाधित हो गईं, जिससे तेल की कीमतों में अस्थायी उछाल और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता उत्पन्न हुई। भारत सहित कई ऊर्जा आयात करने वाले देशों ने इस स्थिति को लेकर चिंताएँ व्यक्त कीं और तटस्थ समाधान की अपील की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मंच पर “असंविद्ध हिंसा का कोई औचित्य नहीं” कहकर दोनों देशों की कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की और कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का उल्लंघन न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिये खतरा है। उन्होंने सभी पक्षों से संवाद के माध्यम से मतभेदों को सुलझाने और शिपिंग मार्ग की मुक्तता सुनिश्चित करने का आह्वान किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति नियंत्रण से बाहर चली गई तो तेल की आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है, जिससे ऊर्जा कीमतों में दीर्घकालिक वृद्धि का जोखिम बढ़ेगा। Post navigation माली के उत्तरी हिस्से में टुआरेग विद्रोहियों ने कई सैनिकों को बंधक बना लिया हॉरमूज जलडमरूमध्य में अमेरिकी‑ईरानी तनाव: रक्षा मंत्री ने सिटीफ़ायर योजना का उल्लेख