पंजाब भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष बदलते ही प्रदेश कांग्रेस में भी बदलाव की चर्चा शुरू हो गई है। दरअसल, कल यानि शुक्रवार को दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पंजाब के शीर्ष 5 नेताओं को दिल्ली बुला लिया है। जिसमें प्रदेश कांग्रेस में पंजाब प्रधान के बदलाव पर विचार विमर्श हो सकता है। इसके संकेत पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री एवं गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर रंधावा ने दिए हैं। एक निजी चैनल से बातचीत में सुखजिंदर रंधावा ने कहा कि कांग्रेस हाईकमान ने मीटिंग बुलाई है। लेकिन, उसमें भाजपा की तरह नेतृत्व में बदलाव होगा या नहीं ये मीटिंग में जाकर ही पता चलेगा। ये नेता होंगे बैठक में शामिल हालांकि, सुखजिंदर रंधावा ने दिल्ली में बैठक में शामिल होने वाले नेताओं के नाम नहीं बताए। लेकिन, चर्चा है कि बैठक में सुखजिंदर सिंह रंधावा के अलावा, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, प्रताप सिंह बाजवा, चरणजीत सिंह चन्नी और डॉ. अमर सिंह शामिल हो सकते हैं। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर पनप रहा असंतोष बता दें, पार्टी के कुछ नेता मानते हैं कि राजा वड़िंग को हटाकर नए चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए, जबकि वड़िंग समर्थक कहते हैं कि 2027 चुनाव तक नेतृत्व बदलना नुकसानदायक होगा। इसके अलावा, कांग्रेस के भीतर यह बहस चल रही है कि 2027 विधानसभा चुनाव किसी एक चेहरे पर लड़ा जाए या सामूहिक नेतृत्व में। केंद्रीय नेतृत्व ने फिलहाल कोई मुख्यमंत्री चेहरा घोषित नहीं किया है। चन्नी की बयानबाजी से भी हुआ था विवाद इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी ने संगठन में दलित नेताओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की मांग उठाई थी। इसके बाद पार्टी में बयानबाजी तेज हुई और वड़िंग ने सार्वजनिक तौर पर जवाब दिया। वहीं, हाल में एक वायरल ऑडियो और एक वीडियो क्लिप को लेकर भी विवाद हुआ, जिसमें उन पर दलित समुदाय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी का आरोप लगा। पंजाब एससी आयोग ने भी रिपोर्ट मांगी है। वड़िंग ने इसे “डॉक्टर्ड वीडियो” बताया है। प्रताप बाजवा बनाम वड़िंग की अंदरूनी राजनीति दोनों नेताओं के बीच सीधी बयानबाजी भले कम हो, लेकिन टिकट वितरण, संगठन नियंत्रण और 2027 की रणनीति को लेकर दोनों खेमों की प्रतिस्पर्धा लगातार चर्चा में रहती है। फिलहाल कांग्रेस हाईकमान ने सार्वजनिक रूप से राजा वड़िंग पर भरोसा जताया है, लेकिन पंजाब इकाई में अंदरूनी खींचतान खत्म नहीं हुई है। Source: Source Post navigation काकोली घोष बनाम कल्याण बनर्जी की जंग ममता कब तक इग्नोर करेंगी? जाति सर्वे रिपोर्ट से बढ़ी सियासी चुनौती, सिद्धारमैया के फैसले ने कांग्रेस को उलझन में डाला