संयुक्त राज्य अमेरिका ने यूरोपीय संघ (ईयू) से आयातित कारों पर मौजूदा 15 % के टैरिफ़ को 25 % तक बढ़ाने की योजना की घोषणा की है। यह कदम ईयू द्वारा पिछले वर्ष हस्ताक्षरित व्यापार समझौते के नियमों का पालन न करने के जवाब में उठाया गया है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग के अनुसार, नई दरें विशेष रूप से महंगी लग्ज़री कारों को लक्ष्य बना रहे हैं, क्योंकि उनका आयतन और मूल्य दोनों ही अधिक है। टैरिफ़ वृद्धि से यूरोपीय निर्माताओं को अमेरिकी बाजार में अपनी कीमतें बढ़ानी पड़ सकती है, जिससे संभावित खरीदारों की संख्या घटने की आशंका है। इसके विपरीत, घरेलू मोटर कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में कुछ लाभ मिल सकता है, लेकिन आयातित घटकों की लागत बढ़ने से उत्पादन लागत भी प्रभावित होगी। व्यापार विश्लेषकों का मानना है कि यह नीति दो पक्षों के बीच मौजूदा व्यापार असंतुलन को संतुलित करने का प्रयास है, परन्तु यह वैश्विक ऑटो उद्योग में मूल्य अस्थिरता को भी जन्म दे सकती है। यूरोपीय संघ ने इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देने और संभावित प्रतियों के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। स्थिति को देखते हुए, अगले कुछ महीनों में दोनों पक्षों के बीच वार्ता के नए मोड़ की संभावना बनी हुई है। Post navigation सूडान ने इथियोपिया के दूतावास से राजदूत को वापस बुलाया, कई हवाई अड्डे पर हमलों की जिम्मेदारी पर आरोप आर्सेनल ने एटलेटिको को हराकर 20 साल में पहली बार चैंपियंस लीग फाइनल में जगह पक्की की