उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने हालिया कार्यक्रम में अंग्रेजी बाल कविताओं की शैक्षिक उपयोगिता पर प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा कि पश्चिमी संस्कृति से ली गई इन कविताओं में नैतिक मूल्यों की कमी है और वे बच्चों में असत्यवाद को प्रोत्साहित कर सकती हैं। समारोह में वह शिक्षकों से आग्रह कर रहे थे कि वे अपने विद्यार्थियों को सच्चाई और ईमानदारी के गुण सिखाने में अग्रणी भूमिका निभाएँ। उपाध्याय ने बताया कि भारतीय साहित्य में कई गाथाएँ और कहानियाँ हैं जो नैतिक शिक्षा के लिए अधिक उपयुक्त हैं। उन्होंने स्वतंत्रता के बाद से चल रही अंग्रेजी‑हिंदी द्विभाषी शिक्षा नीति की भी समीक्षा की, और स्थानीय भाषा में रचनात्मक सामग्री के विकास की आवश्यकता पर बल दिया। शिक्षा विभाग ने इस दिशा में कई पहलें शुरू करने का संकेत दिया, जिसमें मूलभूत साहित्यिक सामग्री को स्कूल पाठ्यक्रम में सम्मिलित करना और शिक्षकों को प्रशिक्षण देना शामिल है। इस टिप्पणी के बाद कई शैक्षिक विशेषज्ञों ने शब्द चयन और साहित्यिक विविधता पर खुली चर्चा की शुरुआत की, यह विचार विमर्श शिक्षा में सांस्कृतिक संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को उजागर करता है। Post navigation ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद भारत की रक्षा तैयारियों में प्रमुख बदलाव पंजाब के दो बम विस्फोटों की जांच में NIA ने तेज़ की कार्रवाई, समान मॉड्यूल पर संदेह