पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को भारी हार का सामना करना पड़ा और प्रमुख विवाद का केन्द्र बने ममता बनर्जी के “इस्तीफा नहीं देता” के बयान पर राजनीतिक बहस तेज़ हो गई। चुनाव परिणामों की आधिकारिक घोषणा के बाद, कई राजनीतिक विश्लेषकों ने अनुमान लगाया कि विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होते ही नई सरकार गठन की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाती है। इस संदर्भ में संवैधानिक विशेषज्ञों का मत है कि मुख्यमंत्रियों की पदस्थीति का अंत केवल चुनाव परिणाम से नहीं, बल्कि राज्यपाल द्वारा नई मंत्रिमण्डल के गठन के बाद ही स्पष्ट होता है।

राज्यपाल, जो केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हैं, को संविधान के अनुच्छेद 163 और 164 के तहत नई सरकार बनाते समय अधिकार प्राप्त है। यदि विपक्षी दल बहुमत हासिल करता है, तो राज्यपाल को उसी के प्रमुख को मुख्यमंत्री नियुक्त करना पड़ता है और उसके बाद बाकी मंत्रियों की नियुक्ति होती है। इस प्रक्रिया में वर्तमान मुख्यमंत्री का इस्तीफा अनिवार्य नहीं है, जब तक कि राज्यपाल नई व्यवस्था नहीं स्थापित कर लेते।

वर्तमान राजनीतिक माहौल में मुख्य प्रश्न यह है कि क्या राज्यपाल नई सरकार के गठन की दिशा में कदम उठाएंगे या ममता बनर्जी के कहे अनुसार न नियुक्ति के बाद मौजूदा प्रशासन को जारी रखेंगे। इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और राज्यपाल की कार्रवाई का देशभर में निकटता से निरीक्षण किया जा रहा है।