छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के जंगलों में बहुमूल्य वनौषधियों हर्रा और बहेड़ा के उत्पादन में पिछले तीन सालों से भारी गिरावट आ रही है। इनकी खरीदी लगभग बंद हो चुकी है और उत्पादन करीब 90 प्रतिशत तक घट गया है। जंगलों में फलन कम होने से वनाश्रित परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है। आयुर्वेदिक दवाओं का कारोबार भी इससे गंभीर संकट में आ गया है। विशेषज्ञ इसके लिए बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई, अनियमित बारिश और बढ़ते तापमान को जिम्मेदार मानते हैं। ये दोनों औषधियां आयुर्वेद और स्थानीय आदिवासी संस्कृति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। अगर समय रहते संरक्षण के उपाय नहीं किए गए, तो ये वनौषधियां पूरी तरह दुर्लभ हो जाएंगी। प्रशासन ने चिंता तो जताई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। Source: Source Post navigation भारत-बांग्लादेश बॉर्डर का 600 KM का ‘डार्क जोन’, जहां से होती है घुसपैठ और तस्करी, BSF लगा रही ‘स्मार्ट फेंसिंग’ UP में तबाही: आंधी-तूफान और बारिश से 16 लोगों की मौत, बुंदेलखंड में सबसे ज्यादा 10 लोगों की गई जान