भारतीय वायुसेना अब लंबी दूरी तक मार करने वाले स्वदेशी कामिकेज़ (आत्मघाती) ड्रोन विकसित करने की तैयारी कर रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना और विदेशी तकनीक पर निर्भरता को कम करना है। इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए वायुसेना ने भारतीय कंपनियों से निविदाएं (बीड्स) आमंत्रित की हैं। यह कदम भविष्य के युद्धक्षेत्रों में ड्रोन की बढ़ती भूमिका को देखते हुए उठाया गया है। इससे वायुसेना को युद्ध के दौरान दुश्मन के ठिकानों को सटीक तरीके से नष्ट करने में बड़ी मदद मिलेगी। ड्रोन तकनीक में आत्मनिर्भरता आने से देश की सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी। इस बड़ी परियोजना के अलावा, वायुसेना 87 लंबी दूरी के मानव रहित हवाई वाहनों (यूएवी) के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण अनुबंध पर भी काम कर रही है। यह पहल भारतीय रक्षा उद्योगों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगी। साथ ही, यह अत्याधुनिक युद्ध प्रणालियों में भारत की तकनीकी क्षमताओं को विश्व स्तर पर प्रदर्शित करेगी। रक्षा मंत्रालय की यह नीति देश को सैन्य साजो-सामान के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। Source: Source Post navigation बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं मिलेगी खांसी की दवा, केंद्र सरकार ने बदले नियम IMD की नई चेतावनी: गंगटोक से केरल तक मौसम का बदला मिजाज, यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह