केंद्र सरकार इमारतों की सुरक्षा और निर्माण गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए नया कदम उठाने पर विचार कर रही है। इसके तहत भवनों के लिए ‘ड्यूरेबिलिटी सर्टिफिकेट’ जारी करने की व्यवस्था लागू की जा सकती है। यह पहल असुरक्षित और कमजोर निर्माण को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच सामने आई है। हाल के वर्षों में कई जर्जर और अनुपयुक्त भवनों को अदालत के आदेश पर ध्वस्त करना पड़ा है। दिल्ली में भवन ढहने जैसी घटनाओं ने भी सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े किए हैं। वाराणसी में एक पुराने ढांचे के आंशिक रूप से गिरने की घटना ने चिंता और बढ़ा दी। प्रस्तावित सर्टिफिकेट का उद्देश्य भवनों की मजबूती और दीर्घकालिक सुरक्षा का आकलन करना है। इससे निर्माण क्षेत्र में जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मददगार साबित हो सकता है। सरकार इस संबंध में विभिन्न पक्षों से सुझाव और राय ले रही है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो निर्माण मानकों में व्यापक सुधार देखने को मिल सकता है।

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