भारत का तोपखाना आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप तेजी से बदल रहा है। सेना लंबी दूरी तक सटीक निशाना साधने वाली प्रणालियों पर विशेष जोर दे रही है। यह बदलाव वैश्विक स्तर पर प्रिसिजन और लॉन्ग-रेंज वॉरफेयर की बढ़ती प्रवृत्ति के अनुरूप है। इस आधुनिकीकरण का आधार फील्ड आर्टिलरी रेशनलाइजेशन प्लान को माना जा रहा है। योजना के तहत पुराने और सीमित क्षमता वाले तोप सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से बदला जा रहा है। उनकी जगह आधुनिक और स्वदेशी तकनीक से विकसित हथियारों को शामिल किया जा रहा है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए घरेलू उद्योगों की भूमिका भी बढ़ रही है। नई तोप प्रणालियां अधिक दूरी, बेहतर सटीकता और तेज तैनाती जैसी क्षमताओं से लैस हैं। इससे भारतीय सेना की मारक शक्ति और युद्धक तैयारी में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। आधुनिक तोपखाना सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक बढ़त दिलाने में भी अहम भूमिका निभा सकता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भविष्य के युद्धों की चुनौतियों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण है। स्वदेशी रक्षा उत्पादन और तकनीकी उन्नयन के चलते भारत वैश्विक सैन्य शक्ति के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर रहा है। Source: Source Post navigation सुरक्षा जरूरतों में आत्मनिर्भरता जरूरी, भारत को अपने संसाधनों पर रखना होगा नियंत्रण: राजनाथ सिंह बुलेट ट्रेन से जुड़ेगा पटना, दिल्ली का सफर 5 घंटे से भी कम समय में होगा पूरा