भारत की समुद्री सुरक्षा के सामने पनडुब्बियों से जुड़ा खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तान और चीन अपनी पनडुब्बी क्षमताओं का विस्तार कर रहे हैं, जिससे भारतीय नौसेना पर दबाव बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए नौसेना को अधिक एंटी-सबमरीन वारफेयर (ASW) हेलिकॉप्टरों की आवश्यकता है। हाल के वर्षों में भारत ने आधुनिक MH-60R हेलिकॉप्टरों को शामिल किया है। हालांकि, विशाल समुद्री क्षेत्र और बढ़ती सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए मौजूदा संख्या पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। ASW हेलिकॉप्टर दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नौसेना के अग्रिम मोर्चे के युद्धपोतों को ऐसी हवाई क्षमताओं से लैस करना रणनीतिक रूप से जरूरी माना जा रहा है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने इस आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। रक्षा विशेषज्ञ स्वदेशी हेलिकॉप्टर कार्यक्रमों को तेज गति से आगे बढ़ाने की वकालत कर रहे हैं। इससे विदेशी निर्भरता कम होगी और दीर्घकालिक सुरक्षा क्षमताएं मजबूत होंगी। समुद्री मार्गों और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए आधुनिक ASW संसाधनों का विस्तार आवश्यक बताया गया है। नौसेना की परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए नए हेलिकॉप्टरों की शीघ्र उपलब्धता पर जोर दिया जा रहा है। बढ़ते जलमग्न खतरों के बीच यह क्षेत्र भारत की रक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। Source: Source Post navigation पठानकोट में कैबिनेट मंत्री की जनसभाएं:लाल चंद कटारूचक्क ने 350 लाभार्थियों को स्मार्ट राशन कार्ड बांटे सलेम: मिलिट्री रोड पर दुर्घटना संभावित पुलिया को चौड़ा करने की मांग, विभाग से गुहार