गौतम बुद्ध के प्रसिद्ध विचारों में गहरा सम्बन्ध है जो क्रोध के बारे में था. उनकी यह तथ्यतात्मक विद्यमानी पाठ्य संपदा के अनुसार, क्रोध को गहराई से हल्का करना ऐसा है जैसे किसी और को भयानक कोयला पकड़ना. उनकी मान्यता थी कि गुस्से से जुड़ी चिंता, मानसिक तनाव और देखभाल प्रश्नों का उपयोग होता है. इसका अर्थ है कि गुस्से में रहने से व्यक्तिगत और सामाजिक स्वास्थ्य प्रतिबिम्बीय नुकसान होता है. कई मानवचिकित्सियों ने भी इन तथ्यों को समर्थित किया है, जो कि क्रोध को दबाव रखने और आत्मनियंत्रण करके नियंत्रित किया जा सकता है. इसलिए, अपनी मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए गहरा दबाव पर क्रोध को जाहिर रूप से रखने से बचना आवश्यक है. शांति, मेधात्मक व्यवहार और प्रतिस्पर्धी संस्कृति को नष्ट करने का बढ़ना इन तथ्यों में लगातार विश्वास भाँति दिखाता है.