हिमाचल प्रदेश के चंबा में एक दौरान हुआ अवश्यक हादसे में छह पर्यटकों की मौत और चार अन्य पर्यटकों का घायल होना बताया गया. इस दौरान प्रवासी ककीरा क्षेत्र से गुजर रहे थे, जब गाड़ी मोड़ के पास गाड़ी के ड्राइवर ने बैठकर गाड़ी से कंट्रोल खो दिया. और तेजी से चलने वाली गाड़ी उछलकर सैकड़ों फीट गहरी खाई में गिरी, इससे कई भाग गाड़ी का बिन्दुपथ हो गया. जब हादसा संतुलित हुआ, तो स्थानीय लोग श्रम करके अतिरिक्त बचाव करने की कोशिश की. पहले दो मौतें जानबूझ कर सुनाई आई, इसके बाद छह और चार का घायल होना भी प्रमाणित हो गया. लोगों की जब्त से उतार-चढ़ाव में नैसर्गिक अपघात और मनुष्य शक्ति के मिलावाले इस संगठन की काफी डार्मिटा दिखाई दी. आत्मविनाशशील अवस्था में, पर्यटकों और स्थानीय लोगों के बीच रणनीति एक दूसरे को छूटने वाला आवश्यक पहलु हो गई. अपनी जिंदगी से भागकर, बचाव संगठनों ने मददकर्ताओं की प्रहरी रुचियाँ बढ़ावत की, जिससे इस दौरान लाशें बचाई गई. हादसे का मानदन व्यक्ति और स्थानीय आरोपियों में एक प्रतिक्रिया के रूप में व्यवस्था ली गई, जहाँ अनुमान चला और सुधार की कोशिश की. इस दौरान हादसे पर सिफारिशें और योगदान लिए गए जिससे क्षेत्र की खाई के बचाव में इतनी अधिक संयम हुआ. हादसे के परिणामस्वरूप चंबा की राज्य कल्पना में एक बड़ी ध्वज भी हो गई. इस दौरान समुदाय की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण हुई, जहाँ लोग अपने खाई बचाव के लिए संगठन गए. इस दौरान स्थानीय शिकारी और प्रवासी में सहयोग का हकदार हुआ, जो इतने भावी तथा अनुभावी था कि लोग एक दूसरे को मदद करने की संवेदनशीलता और सहयोग प्रदर्शित करते रहे. हादसे का परिणाम, क्षेत्र के खाई की बचाव में इतनी अधिक संयम के लिए उद्धृत किया जा सकता है, जो आत्मविनाशशील परिस्थिति में भी अपनी वहीं क्षमताओं का प्रयोग करने में सफल रहे. इसके अलावा, हादसे में लाई गई योजनाओं और बचाव की प्रणालियों का उपयोग स्थानीय तथा राष्ट्रिय संस्थाओं में भी महत्वपूर्ण हुआ, जो परिस्थिति के अध्ययन और सुधार के लिए बढ़ावत देने की कोशिश करती हैं.