बैंक ग्राहकों ने कई बार पाया है, कि अपनी सेवाओं के लिए घंटों तक इंतजार करने की ज़रूरत होती है, जब ग्राहकों को अपने ग्राहक सेवाओं पर आधिकारिकता नहीं मिलती. यह बात सामग्री कर्मचारियों की कमज़ोरति और अनुशासन विषयक छूट-छूटियों के कारण होती है. इसके अलावा, ग्राहकों को बैंक सर्विस के लिए आरबीआई युक्त जानकारी देने की अधिकार है, लेकिन इन अधिकारों का सही प्रयोग नहीं मिलता. यद्यपि बैंकों द्वारा आरबीआई टाउरेंट प्रणाली के अनुसार सफल ग्राहक सेवाएँ हैं, यदि जानकारी को ग्राहकों को पहचानने में कठिन बनाता है, तो इसमें खराबी दिखाई देती है. यह स्थिति कर्मचारियों और ग्राहकों में एक विस्तृत अनुदान का प्रतिशोध है, जिसमें से दोनों पक्ष उपलब्ध पहचानी और संसाधनों का सही उपयोग करने में अक्षमता दिखाते हैं. यदि बैंक प्रणाली में सुधार की कल्पना की जाए, तो ग्राहकों और कर्मचारियों के दोनों तरफ फुल पक्ष सुविधाओं में लाभ मिल सकता है. 🔗 Read original source — Aaj Tak Post navigation खाली पेट में सुबह चाय का प्रभाव: किडनी पर होने वाले खतरे खेलते हुए मासूम पर गिरा लोहे का गेट, सीसीटीवी में कैद हुई दर्दनाक मौत