राजस्थान के कोटा और बीकानेर जिलों में प्रसव के बाद हुई सात महिलाओं की दुखद मौतों ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है। इन मौतों का कारण कथित तौर पर सरकारी अस्पतालों में आपूर्ति की गई घटिया और नकली दवाओं को माना जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए भारत सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि ‘जैक्सन लेबोरेटरीज’ द्वारा आपूर्ति किए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन गुणवत्ता परीक्षण में विफल रहे और उनमें सक्रिय तत्व नदारद थे। केंद्र सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पंजाब और हिमाचल प्रदेश में स्थित उक्त कंपनी की निर्माण इकाइयों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। राज्य और केंद्र की टीमें दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला, खरीद रिकॉर्ड और अस्पताल के प्रोटोकॉल की गहन समीक्षा कर रही हैं। यह घटना सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में दवाओं की सुरक्षा और गुणवत्ता जांच पर बड़े सवाल खड़े करती है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि WHO की यह पूछताछ एक नियमित प्रक्रिया है ताकि अन्य देशों में इन दवाओं के वितरण के जोखिम का आकलन किया जा सके। जोधपुर के सरकारी अस्पतालों से भी प्रसव के बाद महिलाओं में गंभीर जटिलताओं की रिपोर्ट सामने आई है, जिससे पूरे राज्य में चिंता का माहौल है। पीड़ितों के परिजनों ने दोषी अधिकारियों और आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। राज्य सरकार ने इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष टीमें गठित की हैं और स्वास्थ्य केंद्रों पर सख्त निगरानी के निर्देश दिए हैं।

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