मध्य प्रदेश की चार पारंपरिक आदिवासी फसलों को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया गया है। इस मान्यता से इन फसलों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। GI टैग मिलने से इन उत्पादों की ब्रांड वैल्यू और बाजार में मांग बढ़ने की संभावना है। यह कदम आदिवासी किसानों की आय बढ़ाने में सहायक माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे पारंपरिक कृषि पद्धतियों को भी बढ़ावा मिलेगा। राज्य सरकार ने इस उपलब्धि को कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया है। इन फसलों की विशिष्टता उनके क्षेत्रीय गुणों से जुड़ी हुई है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी। यह पहल जैव विविधता और पारंपरिक खेती के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। Source: Source Post navigation सग्गू चौक के पास सड़क धंसने से मरम्मत कार्य के लिए मार्ग बंद किया जाएगा 2012 में स्वीकृत लोहेगांव उप-जिला अस्पताल अब ट्रायल आधार पर शुरू होने जा रहा है