अमृतसर में मानसून की दस्तक के साथ ही नगर निगम के तैयारियों के दावे खोखले नजर आ रहे हैं। ढप्पई रोड, जहाजगढ़, चमरंग रोड और मकबूलपुरा जैसे संवेदनशील इलाकों में सीवरेज का गंदा पानी जमा है और नालों में गाद भरी हुई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल मानसून में उनके क्षेत्र 4 फुट तक पानी में डूब जाते हैं, जिससे उनका जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। सबसे गंभीर चिंता जौड़ा फाटक रेलवे अंडरपास को लेकर है; यदि वहां जल निकासी के पुख्ता इंतजाम नहीं हुए, तो बटाला रोड, शिवाला और मोहकमपुरा सहित दर्जनों इलाकों का शहर से संपर्क पूरी तरह टूट सकता है। हालांकि, नगर निगम के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर हरप्रीत सिंह ने स्पष्ट किया है कि 60 किलोमीटर सीवरेज नेटवर्क की डीसिल्टिंग का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 26 किलोमीटर का कार्य पूरा हो चुका है। शेष कार्य को मानसून से पहले युद्ध स्तर पर पूरा करने का दावा किया गया है, ताकि शहरवासियों को जलभराव की समस्या से राहत मिल सके।

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