देश भर के रेजिडेंट डॉक्टर अत्यधिक कार्यभार और अमानवीय कामकाजी परिस्थितियों के बीच काम करने को मजबूर हैं। हालिया सर्वे में खुलासा हुआ है कि डॉक्टर अक्सर 36-36 घंटे की लगातार शिफ्ट में काम कर रहे हैं, जिससे उन्हें नींद की गंभीर कमी हो रही है। इस असहनीय कार्यशैली के कारण डॉक्टर शारीरिक थकान और मानसिक बर्नआउट के शिकार हो रहे हैं। लंबी ड्यूटी के कारण डॉक्टरों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता पर भी खतरा मंडरा रहा है। सर्वे में डॉक्टरों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि लगातार काम करने से उनकी निर्णय लेने की क्षमता भी प्रभावित हो रही है। डॉक्टरों ने मांग की है कि कार्य के घंटों को तर्कसंगत बनाया जाए और उनके लिए एक बेहतर कार्य वातावरण तैयार किया जाए। नींद की कमी और तनाव के कारण युवा डॉक्टरों में अवसाद और चिंता जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। अस्पताल प्रशासन द्वारा कार्यभार का उचित बंटवारा न होने से स्थिति और अधिक गंभीर होती जा रही है। चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग को अब इन मूलभूत समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना होगा। डॉक्टरों के अनुसार, यह केवल उनके स्वास्थ्य का मामला नहीं बल्कि रोगी सुरक्षा से भी जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। सरकार को इन परिस्थितियों में बदलाव के लिए तत्काल नीतिगत हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है। Source: Source Post navigation भारत में पढ़ाई की योजना? विदेशी छात्रों के लिए FRRO रजिस्ट्रेशन और वीज़ा नियमों पर सरकार की गाइडलाइन उत्कल विश्वविद्यालय में शिक्षाविदों के लिए एनईपी ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित