साहिल चौधरी ने भारत और जर्मनी की वर्क कल्चर की तुलना करते हुए बताया कि जर्मनी में वह 40 घंटे काम करके भारत में 70 घंटे काम करने से ज्यादा काम कर लेते हैं. उन्होंने कहा कि जर्मनी की परिस्थितियों में, कलाकारों और कार्यकर्ताओं की समृद्ध आर्थिक स्थिति और उनकी सुविधाएँ काम के मजबूत बल का प्रतिनिधित्व करती हैं. जर्मनी में कार्य समय की दृष्टिकोण भारत में अंतर दर्शाती है, जहाँ कानून के आधार पर 40 घंटे का सीमित काम समय के साथ भी लोग अत्यधिक काम करते हैं. चौधरी ने बताया कि जर्मनी में कलाकारों और कार्यकर्ताओं की प्रेरणा और उद्यमिता से काम करना बहुत अधिक मजबूत है. इसके नेष्ट वर्ल्ड रूल्स में, जर्मनी का आर्थिक सफलताएँ और अधिक संवेदनशील पेशेवरों के लाभ भारतीय टॉपिक की तुलना में बहुत अधिक हैं. यह आंकड़ा साहिल चौधरी ने देखा, जिसमें उन्होंने कहा कि जर्मनी में अपने 40 घंटे कार्यक्रम को बदलने से दूसरों की तुलना में लोग अधिक काम करते हैं.

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