छत्तीसगढ़ के 13 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए सरकार की ‘चरण पादुका’ योजना एक बड़े विवाद का केंद्र बन गई है। तेंदूपत्ता तोड़ने का सीजन समाप्त हो चुका है और मजदूरों को मजदूरी मिल गई है, लेकिन उन्हें मिलने वाली चरण पादुकाएं (जूते) अब तक नहीं मिली हैं। विभागीय अधिकारियों की मनमानी और टेंडर प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों के कारण यह योजना पूरी तरह से फंस गई है। विभाग अब इन जूतों को अगस्त के दूसरे सप्ताह में वितरित करने की तैयारी कर रहा है, जबकि इनका मुख्य उपयोग भीषण गर्मी के महीनों मई और जून में था। इस लापरवाही पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। योजना में हुई देरी के कारण गरीब संग्राहकों को तपती धूप में नंगे पैर काम करने को मजबूर होना पड़ा। टेंडर के इस ‘खेल’ ने शासन की मंशा और प्रशासनिक कार्यकुशलता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। वर्तमान में यह मामला कानूनी और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। Source: Source Post navigation गुरदासपुर से तीर्थ यात्रियों का जत्था रवाना: ‘मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना’ के तहत तीन दिन की पवित्र यात्रा रथ यात्रा के लिए माझी की 10-सूत्रीय गाइडलाइन जारी, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा पर रहेगा विशेष जोर