सऊदी अरामको सीईओ अमीन नासिर द्वारा घोषित एक बड़ी आपातकाल की खबर पहले ध्यान में ली जा रही है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी द्वारा तेल की आपातकाल शुरू हुई है, जो पूरे विश् में एक गहरा संकट चलाने वाली है. इस संकट की आवश्यकता से भारत अपनी तेल बचाव और प्रणाली को बदलना चाहिए.

अमीन नासिर की घोषणा के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की बाधा ने पूरी दुनिया की तेल कंपनियों की दौड़-कोश रफ्तार कर दी है. जहां-जहां संबंधित कंपनियां इस बाधे का प्रतिक्रिया देने के लिए अपने फ्लो की संशोधन कर रही है, तेल मूल्य और उच्च प्राप्ति वाले देशों में आर्थिक भावना का आपदा सुदृश हो रहा है.

भारतीय तेल बचाव प्रणाली में से कुछ नए उपायों की जरूरत दिखाई दे रही है. गैस और ऑल क्षेत्रों में आगे बढ़ने का प्रयास, संकट के अपघोषणा मुद्दों की एक व्यवस्था और उत्पादिक तेल की आरक्षण के प्रयास सभी हमारे संबंध में जोखिम से बचने में मदद कर सकता है.

कुछ स्थानीय शहरों और अस्पतालों की तेल खादित प्रणाली में ये आपदा ज़्यादा हलकी है, तथापि एक समकड़ नहीं. सोसाइटी के अन्य विभाग और उत्पादन श्रेणियों में भी आयात-आपत हुई है, जहाँ पर संबंधित कंपनियों ने अपनी पद्धतियों की बदलाव की घोषणा की.

भारत को इस समय में सबसे ज़रूरी कि तेल आपातकाल को सफल नियंत्रण करना है. देश की व्यापार और खरद-सुधार प्रणाली में ज़ोर डालकर बचाव के अभ्यास विकसित करना, इस संकट के उपचार और एक नया दौलत प्रणाली को खेलना चाहिए. तेल बचाव के अभ्यास में सहस्थीकरण, गैस और ऑल क्षेत्रों के प्रयोग में ज़ोर डालना और उत्पादिक तेल के संरक्षण के लिए नई पद्धतियों की शुरुआत भारत को बचाव और आर्थिक सुरक्षा के महत्त्वपूर्ण हिस्से के रूप में दिखाई देने वाली है.

दुनिया भर में आयात-आपत से भारत अभी तक बचा है, क्योंकि तेल खादित प्रणाली और उत्पादन क्षेत्र में विभिन्न बदलाव हुए हैं. सरकार और अस्थायी गठबंधनों के लिए उत्पादन श्रेणियों में नई पद्धति विकास का सहयोग मांग रही है, जो तेल आपातकाल के दौरान देश के आर्थिक सुरक्षा को प्रदान कर सकती है.

इस संकट में, भारत को तेल बचाव के अभ्यास में ज़्यादा जोड़ने की आवश्यकता है. गैस और ऑल क्षेत्रों में उत्पादन सुधार, संरक्षण प्रणालियों में नई पद्धतियों का शैली और सरकार तथा व्यवसाय के बीच का कुशल भ्रमण एक अनिवार्य हिस्सा बन जाएगा.

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