सोमनाथ मंदिर की महत्त्वपूर्ण इतिहासी कथाएँ और ज्योतिर्लिंग से संबंधित प्राचीन धार्मिक मान्यताएँ देश और वैश्विक भावकर्ता को जल्द ही से इस्तेमाल की गई हैं। 1025 में मुगल सैन्य के प्रहार और बाद के विभिन्न घटनाओं को जानने का प्रयास करें।

सोमनाथ मंदir की इतिहास का सबसे अहम घटना 1025 ई. में हुआ है, जब दक्षिण ईरान के मुगल सैन्य अल-मुंजिब-अल-मुमीसिन राजा महमूद गजनवी ने लोकप्रिय शिवलिंग को हटा दिया। इस क्रामाक्रम से पहले, मंदir का शिवलिंग ज्योतिर्लिंग की तरह चुंबकीय आवश्यकताओं के लिए उपयोगिता प्राप्त की थी।

मंदir के इतिहास में कई राजाएँ और संस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण घटनाएँ हुई हैं। बाद की अवधि में, विभिन्न राजा और संस्थाएँ मंदir के धाम और इसके शिवलिंग पर बहुत ही चित्रित दावों का आयोजन किया।

मंदir की गुरुत्वाकर्षण शक्ति और इसके शिवलिंग में लगी जड़ें ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भी गहरा संघर्ष उत्पन्न किया। 1947 के मुख्य अवसरों के प्रकार की घटनाएँ की जांच करें, जिसमें विभिन्न संस्थाओं और राज्यों ने मंदir और इसका शिवलिंग पर दावा किया।

मंदir की आधुनिक संरचना तथा इसके चुंबकीय महत्व को ध्यान में रखते हुए, गवर्नमेंट और संस्थाएँ अनिश्चित परिस्थितियों में कई बार इसका दावा लगाया। लेकिन, मंदir के गुरुत्वाकर्षण शक्ति का समाजी और धार्मिक महत्व अब भी बहुत ही प्रभावशाली है।

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