प्रयागराज के संगम पर वैज्ञानिकों ने गंगा-यमुना की बीच जमीन के अंदर 4-5 किलोमेटर चौड़ी एक प्राचीन नदी की खोज की है। राष्ट्रीय गुफा शोध संस्थान (NGRI) के शोधकर्ताओं ने ड्रिलिंग की मदद से इस खोज की पुष्टि की। यह खोज सरस्वती नदी का विश्वास मजबूत करती है, लेकिन कुछ वैज्ञानिक इनकार करके संदेहों बढ़ावा दे रहे हैं। इस प्राचीन नदी की खोज 1400 मीटर गहराई पर की गई है, जो संगम के आधार तक बहुत दistant है। वैज्ञानिकों ने ड्रिलिंग में पाए गए पानी, चट्टान और संरचना का अध्ययन किया है। यह खोज संगम के विश्वास को मजबूत करती है, जो तार्किक और पुराणिक लेखों में बताया गया है। कुछ वैज्ञानिक इन की खोज से जुड़े दार्शनिक प्रश्नों का चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने माना कि यदि इस प्राचीन नदी सत्य है, तो गंगा-यमुना के बीच की परिस्थिति 10,500 साल पहले थी। इसकी खोज इतिहास और ज्योतिष की महत्वपूर्ण गणनाओं में असममति दर्शाती है, जो प्राचीन संस्कृति में रहकर आज भी बहुत विचारालय के गुप्त द्वार हैं। इस खोज पर नए सवालों का उद्भव करने की अवधि में, कई इतिहासकार और वैज्ञानिक इस खोज को पुष्ट करने में हल्का संहार दे रहे हैं। उनका मत है कि अगर यह बात सत्य है, तो इस प्रक्रिया की चर्चा और समझने में वैज्ञानिक दृष्टि की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। यह खोज अधिक संभवतः हीरोनालित श्रद्धा के एक प्रसंग में आ जाएगी, जो कि इसलिए खोज और विचारों का उत्पन्न हुआ है। यह सर्वप्रथम 2013 में NGRI के शोधकर्ताओं द्वारा की गई थी, जब उन्होंने ड्रिलिंग के मदद से आठ पहचानकर्म अंतराल खोजे। इस शोध का फ़ल अब तक कई विचारों और प्रश्नों की जगह देगा। 🔗 Read original source — Aaj Tak Post navigation अमेरिका की अंकलनों से तुरंत पहाड़ कैसे मिटाएं? चीन का व्यापार शक्ति कैसे काम करेगी? किसानों को बड़ी राहत: 15 मई से ट्रैक्टर-हार्वेस्टर पर आवेदन होंगे