कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्कूल के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज POCSO मामले को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में चुप्पी साधना कानूनी लापरवाही और कर्तव्य में चूक के समान है। मामला स्कूल परिसर में एक छात्रा के साथ हुए यौन उत्पीड़न से जुड़ा है। पीड़िता ने घटना की जानकारी वार्डन को दी थी, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। हाईकोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री याचिकाकर्ताओं के खिलाफ प्रथम दृष्टया अपराध का संकेत देती है। अदालत ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों का यह दायित्व है कि वे अपने छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और किसी भी अपराध की तुरंत रिपोर्ट करें। इस फैसले को बाल सुरक्षा और संस्थागत जिम्मेदारी की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। स्कूल अधिकारियों की इस कथित लापरवाही को लेकर अब कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। कोर्ट की इस टिप्पणी ने यह संदेश दिया है कि बच्चों की सुरक्षा के मामलों में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई में अब साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा। Source: Source Post navigation असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में NOC का पेंच: बिलासपुर हाईकोर्ट सख्त, सरकार और CGPSC से मांगा जवाब अनुकंपा नियुक्ति पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 2013 की नीति होगी प्रभावी, पुरानी शर्तों को दी प्राथमिकता