गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि कंपनी एजेंटिक कोडिंग टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपने प्रतिद्वंद्वियों से पीछे चल रही है। कोडिंग में एआई की यह क्षमता वर्तमान में तकनीकी उद्योग के लिए सबसे महत्वपूर्ण और प्रतिस्पर्धी मोर्चे के रूप में उभरी है। इस अंतर को मिटाने के लिए गूगल ने अपने नए टूल्स ‘एंटीग्रेविटी 2.0’ और ‘जेमिनी 3.5 फ्लैश’ पेश किए हैं। हालांकि गूगल के भीतर इन उपकरणों को काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है, लेकिन बाहरी डेवलपर्स और कंपनियों के बीच इनका उपयोग अभी भी प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले कम है। गूगल अब बड़ी कोडिंग परियोजनाओं को आकर्षित करने के लिए अपनी मूल्य निर्धारण नीति में भी बदलाव कर रहा है। कंपनी का लक्ष्य अधिक डेवलपर्स को अपने पारिस्थितिकी तंत्र की ओर लाना है। आने वाले समय में एआई आधारित कोडिंग का बाजार और अधिक आक्रामक होने की उम्मीद है। गूगल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह कितनी तेजी से अपनी इन नई तकनीकों को व्यापक स्तर पर अपना पाता है। यह एआई दौड़ अब केवल बेहतर मॉडल बनाने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह उत्पादकता और उपयोगिता पर केंद्रित हो गई है। बाजार में अपनी खोई हुई साख को वापस पाने के लिए गूगल पूरी ताकत लगा रहा है। Source: Source Post navigation भारतीय व्यापार मंडल में नई नियुक्तियां, दीपक कुमार बने पंजाब महासचिव एक महीने में ₹4000 चढ़ा शेयर, कंपनी ने किया ₹500 प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान