छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बिलासपुर के एक मामले में सुनवाई करते हुए एक बड़ा कानूनी स्पष्टीकरण दिया है। कोर्ट ने साफ किया है कि यदि किसी मामले में आपराधिक तत्व मौजूद हैं, तो उसे केवल ‘सिविल विवाद’ बताकर आपराधिक कार्रवाई से बचा नहीं जा सकता। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिविल और आपराधिक मामले समानांतर चल सकते हैं और किसी विवाद का सिविल स्वरूप होना आपराधिक मुकदमे को रोकने का आधार नहीं हो सकता है। यह फैसला उन मामलों के लिए काफी अहम माना जा रहा है जहाँ अक्सर आरोपी पक्ष मामले को केवल दीवानी (सिविल) प्रकृति का बताकर एफआईआर या आपराधिक जांच को रद्द कराने की मांग करते हैं। कोर्ट के इस रुख से अब उन पीड़ितों को बड़ी राहत मिलेगी जो अपने मामलों में न्याय के लिए आपराधिक प्रक्रिया का सहारा ले रहे हैं। इस निर्णय ने कानूनी प्रक्रिया में स्पष्टता ला दी है कि आपराधिक कृत्यों के लिए कानून अपना काम करेगा, चाहे मामले का कोई दूसरा पक्ष सिविल कोर्ट में ही क्यों न लंबित हो। Source: Source Post navigation दिल्ली में DRDO वैज्ञानिक का घर आग में तबाह, AC शॉर्ट सर्किट से भड़की भीषण लपटें बहादुरगढ़ में अवैध हथियार के साथ युवक गिरफ्तार: बिना नंबर प्लेट की बाइक पर घूम रहा था आरोपी