छत्तीसगढ़ में 10 जुलाई 2026 से धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026 लागू हो गया है। राज्य सरकार ने इसकी अधिसूचना राजपत्र में जारी कर दी है। नए कानून का उद्देश्य जबरन, लालच देकर या धोखाधड़ी से कराए जाने वाले मतांतरण पर रोक लगाना है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है। सामूहिक मतांतरण के मामलों में आजीवन कारावास की सजा दी जा सकेगी। कानून के तहत धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया से 60 दिन पहले संबंधित कलेक्टर को सूचना देना अनिवार्य होगा। निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। सरकार का कहना है कि यह कानून लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए बनाया गया है। अधिनियम लागू होने के साथ ही इसके सभी प्रावधान प्रभावी हो गए हैं। प्रशासन को कानून के पालन और निगरानी के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। Source: Source Post navigation भूमि अधिग्रहण सुनवाई में शामिल न होने वालों को बाद में सुनवाई न मिलने का दावा करने का अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट